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विश्वास!

डॉ. राजबाला चौहान जी द्वारा रचित - NRI हेराल्ड हिन्दी द्वारा प्रकाशित , 22 July 2021

विश्वास ही तो है जीवन का आधार

सभी सम्बन्ध रिश्ते नातों का, बस एक ही आधार |


दुनिया में आने से पहले ही, उस ममता की देवी पर था अटूट विश्वास

उसका दुलार और पिता की उंगली पकड़कर चलने का अहसास, यही तो है असीम विश्वास |


कभी करते ड्राइवर पर विश्वास तो कभी डाक्टर बनते कर्णधार

विश्वास ही तो है जीवन का आधार |

कभी करते जीवन साथी पर विश्वास

कितना सुन्दर ये अहसास |

तो कभी भरोसा बनी नाविक की पतवार

विश्वास ही तो है जीवन का आधार |


कभी छोड़ते बच्चों पर सब संसार

तो कभी करते नियति पर विश्वास |

जिस का चक्र चलता निरंतर

एक ही लक्ष्य 'उस' पर विश्वास, जो है सृष्टि का पालन हार |


बिना विश्वास सब कुछ है बेकार

इस अमूल्य निधि को संजोया जिसने

उतर गया भवसागर से पार

विश्वास ही तो है जीवन का आधार |

 

डॉ. राजबाला चौहान दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में पीएचडी हैं। वह 20 साल पहले 'द आर्ट ऑफ लिविंग' (एक एनजीओ) में शामिल हुईं। इस दौरान आर्ट ऑफ लिविंग की शिक्षिका के रूप में अपनी क्षमता के अनुसार उन्होंने जेलों, गांवों, आवासीय और वाणिज्यिक संगठनों में भी लगभग 200 पाठ्यक्रमों का आयोजन और संचालन किया है। इन्होंने हजारों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है। डॉ. राजबाला चौहान ने अपना जीवन आर्ट ऑफ लिविंग को समर्पित कर दिया है और इस प्रक्रिया में हर दिन लोगों के जीवन को बेहतर बना रही है |

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