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कर्मयोगी रवि कालरा : एक महामानव

रीता राजपूत जी द्वारा सूचित - NRI Herald हिन्दी ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रकाशित 31 July 2021


कर्मण्यवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचन !


हमें कर्म करना चाहिए बिना फल की कामना किए ! क्योंकि फल देना तो परम शक्ति के हाथ में हैं ।यह कथन सुना था लेकिन चरितार्थ होते ‘ द अर्थ सेवियर फ़ाउनडेशन’ गुरुग्राम , हरियाणा में देखा । मानसिक एवं शारीरिक रूप से बीमार तथा अपंग लोगों की सेवा में जुटकर ‘श्री रवि कालरा जी ‘ अपने जीवन को धन्य मानते हैं । एक संपन्न आदमी का अपने घर-बार को छोड़कर ऐसे विकृत मानसिकता से ग्रस्त लोगों की सेवा करना , जिनसे बात करते हुए साधारण व्यक्ति घबराता है कि कहीं वे कोई वार ना कर दें ! ऐसा मानव , महामानव ही हो सकता है ।रवि जी सही अर्थों में मानवता की मिसाल हैं । शायद भगवान कृष्ण ने इसी प्रकार के कर्म की अपेक्षा करते हुए उक्त कथन कहा होगा ।


उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि-

यूँ तो मुझे बचपन से ही सेवा करना अच्छा लगता था । गरीब, दुखी एवं पीड़ित मुझे आहत करते थे । लेकिन एक बार , एक बच्चे और एक कुत्ते को एक साथ कूड़े के ढ़ेर में से खाना बीनकर खाते देखा तो ज़िंदगी की दशा और दिशा दोनों ही बदल गई । अंतरात्मा ने सारे काम छोड़कर बेसहारों का सहारा बनने का आदेश दे दिया । इस यात्रा में पत्नी , बच्चे , परिवार - परिचित सब छूट गए । साथ था तो सिर्फ़ मेरा जज़्बा !

समाज , पुलिस -प्रशासन की ओर से ना जाने कितनी कठिनाइयाँ आयीं । जेल जाना पड़ा। पुलिस की बुरी तरह मार खाई । लेकिन फिर भी मक़सद ही सर्वोपरि था इसलिए प्रभु का आशीर्वाद मिलता रहा और कठिनाइयाँ दूर होती गई ।


संस्था के बाहर एक बड़े बोर्ड पर तथा गेट पर लिखा था - ‘हमारे यहाँ वृद्ध, मानसिक रूप से बीमार व ऐसे लोग जिन्हें कीड़े पड़े होते हैं , लाए जाते हैं । तथा उन्हें रहना-खाना व रोज़मर्रा की सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं ।’‘कीड़े पड़े होते है ‘ कथन मन में हलचल मचा गया …!!


जब हम गए उस समय इस सेवा केंद्र में लगभग 350 रोगी एवं पीड़ित लोग थे ।यहाँ इनके इलाज की पूर्ण व्यवस्था है ।बल्कि संस्था के प्रांगण में एक मिनी अस्पताल - सा देखा जा सकता है ।सेवा में लगभग डेढ सौ लोग लगे हुए थे ।संस्था लावारिस पड़ी लाशों का दाह -संस्कार करने के लिए भी वचनबद्ध है। आजकल यह संस्था स्वच्छता अभियान एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी ज़ोर-शोर से जुटी है । बँधवारी गाँव जो संस्था के निकट ही है । कर्मयोगी रवि कालरा जी का युगों - युगों तक आभारी रहेगा । लगभग चार हज़ार जनसंख्या वाले इस गाँव में तरक़्क़ी के सभी साधन आज कालरा जी के प्रयासों की देन है । यह भारत का ही नही विश्व एक मात्र ऐसा गाँव है जिसका कोना- कोना solar-energy से जगमगा रहा है । इस गाँव की हर रात दिवाली- सी जगमग होती है ।


कालरा जी के सराहनीय कार्यों की ही देन है कि आज बहुत सी बड़ी-बड़ी संस्थाएँ उन्हें सम्मानित करती हैं ।लेकिन अगर इनसे इनकी इच्छा पूछी जाए तो बड़ी ही सादगी से ये पीड़ित लोगों के साथ समय बिताने की प्रार्थना करते हैं ।


मेरे साथ शिवयोग संस्था के लगभग बीस साथी थे-

सबने मिलकर ऐसे लोगों को क्षणिक ख़ुशी देने के लिए दस केक मँगवाए थे ताकि उन लोगों का जन्मदिन मना सकें जिनके जन्म का कोई अता- पता नहीं । गाने की धुन बजते ही सब अपने दुःख- दर्द भूलकर थिरकने लगे । जिसे देख कर आत्मिक ख़ुशी हुई । बाद में उनके लिए विशेष भोजन की व्यवस्था की गई थी ।


वहाँ से निकलते समय हम सभी इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि रवि कालरा जी के जीवन संघर्ष , साहस और जज़्बे पर एक मूवी बननी चाहिए । ताकि समाज इससे प्रेरणा ले सके ।


अगर NRI Herald के देश विदेश के पाठक रवि कालरा जी की संस्था "The Earth Survivor Foundation" की किसी भी प्रकार की सहायता करना चाहें तो वो सारी जानकारी https://www.earthsaviours.in/ पर प्राप्त कर सकते है।


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