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युद्धम शरणम धर्मम शरणम ।

कारगिल विजय दिवस पर भारतीय सेना के शौर्य को समर्पित लोकेश शर्मा जी की भावपूर्ण रचना - NRI हेराल्ड हिन्दी ऑस्ट्रेलिया द्वारा प्रकाशित , 26 July 2021 ( फेस्बूक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर फॉलो करें - @nriherald )


है ये कम्पन अर्जुन के धनुष से,

ये गरजा है आकाश भीम की गद्ह्धा से ।


हुयी माँ गंगा निर्मल, भीष्म पितामह के नमन से,

ये भूमि हुई कोमल, गुरु द्रोण के चरणो से ।


हुयी ये धरा विभोर दानवीर कर्ण के कुंडलो से,

ये धरा का है कण कण कृष्ण से ।


ये धर्म भूमि, ये कर्म भूमि,ये भूमि है न्याय की ,

ये भूमि है गीता के ज्ञान की, ये भूमि है हरी के आयन की ।


नारायणी सेना तो माया है , केवल सत्य हैं नारायण यहाँ,

अर्जुन सी भगती और प्रेम जहां, स्वयं आते नारायण वहाँ।


या फिर परिश्रम के ताप से हुआ जागृत पुरुषार्थ जहां,

जैसे भीष्म पितामाह ..


कर विवश हरी को, हरी से शस्त्र उठवाऊँ,

प्रण ये पूर्ण करूँ रण में, तभी भीष्म कहलाऊँ।


हैं धर्म और सत्य जहां, स्वयं है नारायण वहाँ

निश्चित हैं धर्म की विजय वहाँ।

NRI हेराल्ड की पूरी टीम का भारतीय वायु, जल और स्थल सेना को कोटी कोटी नमन.जय हिन्द 
 

लोकेश शर्मा जी की पैदाइश दिल्ली और स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश की राजकीय पाठशाला से हिंदी माध्यम में प्राथमिक एवम् वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा से है, उसके उपरांत औषधी विज्ञान में स्नातक प्राप्त करके उसी क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया में एक मल्टीनैशनल फार्मा कंपनी में कार्यरत हैं , स्वयं को एक भाषा प्रेमी मानते हैं, हिंदी, उर्दू, डोगरी, बंगाली, हरियाणवी, पंजाबी बखूबी बोल लेते हैं. शब्दों का विश्लेषण कर भाषा को समजने का प्रयास करना पसंद है , मानते है, संस्कृत के ही शब्द हर भाषा में मिलते हैं. गीता ज्ञान को जीवन का मार्ग दर्शक बना के आगे बड़ते है.

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