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मेरा हरियाणा, जय जय मेरा हरियाणा।

Updated: Jul 29, 2021

लोकेश शर्मा जी द्वारा रचित - NRI हेराल्ड हिन्दी द्वारा प्रकाशित, 24 July 2021

दूध दहीं का खाणा, जहाँ होया हरी का आणा,

मर्यादाओं का हुआ बचाणा,

हे ये प्यारा हरियाणा।


यो खेती का खलियाणा ,

मोर की पिहु पिहु । सावण के झूले,

ओर भैंस का बयाणा

हे ये प्यारा हरियाणा।


वो ब्यायी भैंस के दूध की बोल्ली बणाणा।

घोल घोल शक्कर, गुड, बाजरे की रोटी को दब्बा के घी में खाणा,

हे ये प्यारा हरियाणा।


भाई लोगों का भाईचारा, ओर लावणी में साथ सब का आणा,

आते, जाते, अनजान को भी राम राम बुलाणा।

मेरा हरियाणा, जय जय मेरा हरियाणा।


वो चर्चा, वो खाप, वो हुक्का, वो खाट ।

वो सुसरा, वो छोरा, वो बीड्डी, वो ताश ।

वो ओबरा, वो दहीं, वो घी, वो मक्खण।

वो भैंस, वो गोबर पाथना, वो चिक्कड़, वो धूडी, वो गंडासा,

वो भैंस की जुगाली, वो जोहड़ , वो ट्रैक्टर, वो ट्रालि।

वो कबड्डी ,वो अखाड़ा ! वो टुल्लु पे नहाण।

हे ये प्यारा हरियाणा।


ओ ...चौधरी... नू ते बता दे ...

हाट गया यो कोरोना ? ..और इब्ब क़द होगा गाम में जाणा..

सारे बोल देयों जी ... जय जय हरियाणा ।

 

लोकेश शर्मा जी की पैदाइश दिल्ली और स्कूली शिक्षा हिमाचल प्रदेश की राजकीय पाठशाला से हिंदी माध्यम में प्राथमिक एवम् वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा से है, उसके उपरांत औषधी विज्ञान में स्नातक प्राप्त करके उसी क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया में एक मल्टीनैशनल फार्मा कंपनी में कार्यरत हैं , स्वयं को एक भाषा प्रेमी मानते हैं, हिंदी, उर्दू, डोगरी, बंगाली, हरियाणवी, पंजाबी बखूबी बोल लेते हैं. शब्दों का विश्लेषण कर भाषा को समजने का प्रयास करना पसंद है , मानते है, संस्कृत के ही शब्द हर भाषा में मिलते हैं. गीता ज्ञान को जीवन का मार्ग दर्शक बना के आगे बड़ते है.

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