top of page
  • NRI Herald

PFI का खत्म होना रातों रात की नहीं बल्कि शांत दिमाग और 2.5 साल की मेहनत की उपज है - पढ़िए

NRI Herald Australia की सत्यनिष्ठ राय , 29 september 2022

India ban Radical Islamist organisation PFI

भारतीय केंद्र सरकार ने UAPA कानून के तहत PFI और उसकी 8 सहयोगी संस्थाओं पर बीते बुधवार 5 साल के लिए प्रतिबन्ध लगा दिया है.


सुबह से इस ख़बर पर तीन तरह के reaction देखने को मिलें हैं।

1. कुछ लोग खुश हैं

2. कुछ लोग प्रश्न उठा रहे हैं


SDPI पर प्रतिबन्ध भी जल्दी लगेगा।

SDPI एक राजनीतिक दल है, इसलिए उसका काम Election commission के द्वारा होता है .


PFI के नेताओं पर प्रतिबन्ध भी लगेगा.. अभी मात्र 2 कदम ही चली है सरकार, छापे मारे और प्रतिबन्ध लगाया है, धीरे धीरे Evidence के आधार पर सभी नेताओं पर भी लगेगा, वैसे भी PFI की पूरी लीडरशिप अभी NIA की गिरफ्त में है जो लम्बे समय के लिए जेल में ही रहेंगे. NIA का success rate लगभग शत प्रतिशत है ।


PFI का असली चेहरा और असीम पैसों का खेल ।

1. PFI संगठन सन 2006 में बना जिसके सारे सदस्य उन मुस्लिम संगठनों से आए जो संगठन भारत सरकार ने बैन कर दिए थे जैसे सिमी (SIMI)। अब देखो इनकी फंडिंग कैसी होती हे जिसका पता सरकार को है परंतु सरकार कुछ नहीं कर सकती क्योंकि सब नियमानुसार चल रहा हे।


2. PFI के भारत में कुल सदस्यों की संख्या तो मुझे नहीं पता (शायद 50 लाख के करीब हे) परंतु इनके 2 लाख सदस्यों के 2 लाख सेविंग अकाउंट भारत की बैंक में हे।


3. भारत सरकार के नियम के अनुसार आपके परिजन, रिश्तेदार, मित्र कोई भी यदि विदेश में है तो वो हर महीने अधिकतम दस हजार डॉलर (करीब 8 लाख रुपए) भारत भेज सकते है।


4. अपन ये माने की इन दो लाख खातों में हर महीने सिर्फ 500 डॉलर (40 हजार रुपए)इनके परिजन भेजते होंगे, मतलब करीब 800 करोड़ रुपए हर महीने इन दो लाख सेविंग अकाउंट में आते हे।


5. इसका 85% PFI को जाता हे मतलब 680 करोड़ रुपए हर महीने। बाकी बचा 15% ये सेविंग खाते वाले का इनाम है।


6. यदि एक महीने में 680 करोड़ तो साल भर में 8160 करोड़, ओर ये PFI सन 2006 से भारत में हे मतलब करीब 16 सालों से, मतलब 16 साल में इनके पास 1,30,560 करोड़ रुपए की कम से कम विदेशों से फंडिंग हुई हे और ये में प्रतिमाह सबसे कम आकड़े को लेकर बता रही हूं।


अब आप सोचो की यदि हर महीने 500 डॉलर की जगह 2000 डॉलर वो भेजते होंगे तो कितना धन आता होगा ओर सरकार कैसे किसी को जेल में डाल पाएगी।


7. अब समझे CAA, NRC, हिजाब मामला, किसान आंदोलन, कश्मीर में पत्थर बाजी, पूरे भारत में हमेशा कही ना कही हिंदू मुस्लिम के दंगे, सर तन से जुदा पर करोड़ों के इनाम , इन सब कामों के पैसे कैसे आते है। इसीलिए ये कहते है की सन 2047 तक हम भारत को इस्लामी देश बना देंगे।


8. सिर्फ बिहार में PFI के 15000 से ज्यादा ट्रेंड लड़ाके है जिन्हें गृह युद्ध के लिए तैयार किया हुआ है।


9. PFI का बड़ा लड़का SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) ये PFI का राजनैतिक विंग है जो चुनाव लड़ता है ताकि PFI को पूरा राजनैतिक प्रश्रय मिले ओर सीधे लोकसभा ओर विधानसभा में हंगामा मचाकर PFI की सुरक्षा की जा सके। इसी SDPI ने अमित शाह ओर अजीत डोवल को सीधे धमकी दी हे की यदि 24 घंटे में PFI के नेताओ को नहीं छोड़ा तो जो होगा उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।


SDPI के कार्यकर्ताओं पर ही केरल में हिंदुओ की हत्या ओर हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन के अनेक आरोप लगे हुए हे।


10. PFI का छोटा लड़का CFI (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) ये पूरे देश में कॉलेज के मुस्लिम लड़को लड़कियों को जिहाद के लिए तैयार करने का कार्य करते हे क्युकी कॉलेज के बच्चे मानसिक रूप से जिहाद के लिए जल्दी तैयार हो जाते हे । इनको बाबरी मस्जिद की जमीन वापस लाने का टास्क दिया गया हे, इनकी वेबसाइट पर इन्होंने इसी बात का पोस्टर भी खुल्लम खुल्ला लगा रखा हे।


11. PFI की लड़की NWF (नेशनल विमेंस फ्रंट) जो महिला जिहादियों का विंग हे, कहते है की ये सबसे ज्यादा खतरनाक है, ये कोई भी टास्क करने में हिचकती नही हे। कट्टर इस्लाम का फन कुचलने के लिए पीएफआई पर की गई इतनी बड़ी कार्रवाई करने के लिए सरकार और सिस्टम ने कितनी बेहतर योजना और कितनी मेहनत से काम किया-जरा जानिए..


ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए कितनी मेहनत लगती है कितना पूर्वाभ्यास करना होता है ये भी जाने एक साथ पीएफआई के लगभग 500 ठिकानों पर रेड मारना पाकिस्तान पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ही मुश्किल काम था परंतु राष्ट्रवादी सरकार और एजेंसियों की मेहनत ने यह कर डाला। अमित शाह व अजित डोभाल जी ने दिल्ली कंट्रोल रूम से रातों जाकर इस ऑपरेशन की पूरी मॉनिटरिंग भी की।

एजेंसी ऐसे ही जाकर किसी को उठाकर नहीं ले आती, पहले पूरा होमवर्क करती है। भले ही आतंकी इस्लामिक संगठनों के लिए विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हो परंतु आपको सत्य समझना चाहिए।

हम आप खाने कमाने में बिजी रहते हैं परंतु देश की सुरक्षा में लगी एजेंसियां 24 घंटे देश में पनप रहे खतरों को समझने और उनके नेटवर्क को खत्म करने में लगी रहती हैं। पिछले 4-5 महीनों से पीएफआई नेता एनआईए और अन्य गुप्त एजेंसियों की निगरानी में थे। केरल पीएफआई का सबसे बड़ा गढ़ है इसलिए वहां पर विशेष ध्यान दिया गया।


एनआईए अधिकारियों को पहले से ही पता था कि केरल में पीएफआई द्वारा आतंकवादी गतिविधियां फल-फूल रही हैं और इसीलिए केरल पर जोर देते हुए एनआईए व अन्य एजेंसियों के 200 अधिकारियों को यहां भेजा गया।


ये सब पिछले रविवार को केरल के कई हिस्सों में पहुंचे। उन्होंने पीएफआई नेताओं के घर और कार्यालय क्षेत्र के 1 किमी के दायरे में कमरे किराए पर लिए। कोई नहीं जानता था कि वे क्यों आए थे और उनके इरादे क्या थे। वहां से वे पीएफआई नेताओं के घरों और दफ्तरों के रास्तों पर नजर रखते हैं, नक्शे तैयार करते हैं और दिल्ली भेजते हैं।


वहां से अनुमति मिलने के बाद एनआईए, ईडी और अन्य गुप्त एजेंसियों के लगभग 200 उच्च कुशल अधिकारी केरल के कई हिस्सों में पहुंच जाते हैं और केरल के शीर्ष पुलिस अधिकारी भी यह नहीं जानते हैं। रांची से सीआरपीएफ के 10 बटालियन (750 जवान) के गार्ड 200 अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए सभी तरह के अत्याधुनिक हथियारों के साथ कोच्चि पहुंचे. वहां से वे कई समूहों में बंट गए और केरल के विभिन्न हिस्सों में पहुंच गए लेकिन तब तक वे नहीं जानते कि वे क्यों आए हैं।


200 अधिकारी टीमों में बंटे, 3 दिन तक लगातार मॉनिटरिंग में लगे रहे। वे यात्रा करने के लिए टैक्सियों का उपयोग करते हैं और कैब चालक को अपना सेल फोन बंद करने के लिए कहा जाता। 3 दिन की सर्विलांस खत्म होने पर दिल्ली से जानकारी दी गयी कि ये ऑपरेशन ऑक्टोपस है. उसके बाद केरल पुलिस के उच्च अधिकारियों को सूचित किया जाता है।


दूसरी ओर, गिरफ्तार पीएफआई नेताओं को दिल्ली पहुंचाने के लिए सीमा सुरक्षा बल का विशेष विमान कोच्चि एयरपोर्ट पर तैयार रखा गया. दिल्ली से रात 2 बजे ऑपरेशन शुरू करने का आदेश आता है।


रात के 3:30 बजे ये सभी 200 अधिकारी अपने ठिकानों से पास के पीएफआई नेताओं के घर और दफ्तर जाते हैं और सर्च वारंट दिखाकर तलाशी शुरू करते हैं. सुरक्षा कारणों के चलते सीआरपीएफ और लोकल पुलिस को साथ में लगाया जाता है


छापे के 4 घंटे के भीतर, विभिन्न क्षेत्रों से गिरफ्तार पीएफआई नेताओं को कोच्चि हवाई अड्डे पर लाया गया और तैयार उड़ान में दिल्ली लाया गया। भोर तक पीएफआई नेता दिल्ली में थे, इससे पहले कि केरल सरकार कोई हस्तक्षेप कर पाती।


एजेंसी ऐसे ही जाकर किसी को उठाकर नहीं ले आती, पहले पूरा होमवर्क करती है। भले ही आतंकी इस्लामिक संगठनों के लिए विपक्षी पार्टियों की छाती में दूध उतर आया हो और वे मोदी सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हो परंतु आपको सत्य समझना चाहिए।


महाभारत

महाभारत में कंस वध के पश्चात जब जरासंध बार बार श्रीकृष्ण पर हमला कर रहा था तो... श्रीकृष्ण बार बार उसकी पूरी सेना का सफाया कर देते थे लेकिन जरासंध को जीवित छोड़ देते थे.


कारण पूछने पर श्रीकृष्ण ने बताया कि... मैं जरासंध को हर बार जीवित इसीलिए छोड़ देता हूँ

क्योंकि, जरासंध को मारने के बाद उसकी जैसी कुत्सित बुद्धि वाले सारे स्लीपर सेल अंडरग्राउंड हो जाएंगे और फिर उन्हें खोज पाना बेहद मुश्किल होगा...


और, उसके बाद तो हम जान ही नहीं पाएंगे कि... आखिर, ऐसे लोग कहाँ कहाँ मौजूद है.


इसीलिए, मैं बार-बार जरासंध को जीवित छोड़ कर अपना काम उसे सौंप देता हूँ ताकि वो बार बार अपने स्लीपर सेल को एक्टिव करे और मैं उनके स्लीपर सेल को चुन चुन के खत्म कर दूँ ...


इस तरह मैं ऐसे लोगों का एकमुश्त रूप से सफाया कर पाता हूँ.


अब आप महाभारत के उस घटना और अभी के परिदृश्य को मिलाकर देखें तो आपको सबकुछ समझ आ जाएगा.

जब जरासंध ने शाहीन बाग में धरना प्रायोजित किया और दिल्ली में दंगे करवाये उसी समय से वो श्रीकृष्ण के राडार पर आ गया. उसके बारे में तथ्य और सबूत जुटने शुरू हुए कि ये आखिर है क्या ??? इसके मेंबर कितने हैं, पैसे कहाँ से आते हैं , इसके नेटवर्क कहाँ कहाँ तक हैं... आदि आदि.


उधर जरासंध अपनी ताकत में मस्त था कि.... हम तो अजेय हैं क्योंकि हमको राक्षसी जरा (अल्पसंख्यक टैग) का वरदान मिला हुआ है.


हमारे साथ तो इतने कटेशर हैं... इतने देश हैं, इतनी राजनीतिक पार्टियां हैं आदि आदि. साथ ही उनके मन में ये भ्रम भी आ गया कि... मोई सरकार इन्हें प्रेशर कुकर के सीटी की मानती है जो "उनके" प्रेशर को कम करने का काम कर रही है.


श्रीकृष्ण भी मुस्कुराते हुए ऐसे प्रदर्शित करते रहे कि.... वे तो बहुत भोले हैं और वे सचमुच में ऐसा ही सोच रहे हैं जैसा जरासंध के मन में चल रहा है.


उल्टे वे वीकास और तृप्तिकरण का घोड़ा दौड़ाते रहे.


मोहन भागवत और अजित दोवल का खेल

इधर भागवत से लेकर डोवाल और मोई जी कटेशर गुरुओं के साथ मिलते रहे और सबका DNA एक बता कर सबको खीर पूरी खिलाने की बात करते रहे.


इससे जरासंध भी खुश एवं लापरवाह.... कि, हम अजेय हैं... और, हम जब जो चाहे कर सकते हैं. लेकिन, एक दिन सुबह सवेरे पूरे देश में फैले जरासंध के नेटवर्क के 100 ज्यादा हैंडलर पूरे सबूत और डॉक्यूमेंट के साथ धर दबोचे गए.


इसके बाद फिर... एक हफ्ते तक शांति... (शायद उसे फिर से संगठित होने का समय देने के लिए ).

इससे हुआ ये कि 2-3 दिन में जब जरासंध ने समझा कि अब हमला खत्म हो चुका है तो उसने अपने छुपाकर कर रखे हुए संसाधन और लोगों को फिर से एकत्र किया..


और, अपनी ताकत का आकलन करने लगा कि अब हमारे पास क्या और कितना बचा है. तभी ... फिर से दूसरा हमला हुआ एवं उसके दुबारा से एकत्र किए गए लोग एवं डॉक्यूमेंटस को जब्त कर लिया गया.


इस पूरी घटना में मजेदार बात यह रही कि.... जरासंध के नेटवर्क पूरे देश एवं विदेश में फैले होने के बावजूद भी कहीं से भी इसके विरोध में "चूं" तक शब्द नहीं निकला और न ही कोई हंगामा हुआ.


क्योंकि, ये सब करने से पहले ही भागवत और डोवाल द्वारा उनके धर्मगुरुओं को समझा दिया गया था कि.... सेम DNA होने के कारण हम तो तुम लोगों को शुद्ध घी की पूरी और दम आलू की सब्जी खिलाना चाह रहे हैं...


लेकिन, ये जरसंधवा...आपलोगों को बदनाम कर रहा है जिसके कारण जनता हमारे पूरी सब्जी का विरोध कर रही है. इसीलिए... तुमको पूरी सब्जी खिलाने से पहले इस जरसंधवा को बांस करना जरूरी है.


अतः, आपलोग ध्यान रखना कि जब हम उसको बांस करें तो उसकी चिल्लाहट ज्यादा न गूंजे. इस तरह उन दढियलों ने भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए चिल्लाहट नहीं गूंजने दिया और , जरसंधवा को सलीके से बांस कर दिया गया.


खैर... लेटेस्ट अपडेट ये है कि जरासंधवा पर 5 साल तक के लिए बैन लगा दिया गया है.. ताकि, उन जप्त किये डॉक्यूमेंट के आधार पर अब आराम से चुन चुन कर उनके स्लीपर सेल का दबोचा जा सके.


साथ ही.... अभी 5 साल में बहुत से यज्ञ होने हैं इसीलिए, धर्मरक्षक.... यज्ञ के रास्ते में आने वाले सभी संभावित रोड़े को पहले से हटा कर अपनी यज्ञ की सफलता सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं.


पूरी कहानी का सार या है कि.... अब जरासंधवा को फाड़ कर फेंका जा चुका है और अब जरासंध महज एक इतिहास है और, महाभारत के युद्ध में अब जरासंध के कौरवों के पक्ष से लड़ने की आशंका ही खत्म चुकी है.


अगर कोई और सरकार आ गयी तो क्या होगा।

PFI पर UAPA कानून के तहत प्रतिबन्ध लगा है.... UAPA से पहले POTA कानून था.... जो बीजेपी सरकार लायी थी... उस कानून को कांग्रेस ने 2004 में आते ही रद्द कर दिया था.


कल को हो सकता है कांग्रेस या और कोई सरकार आये और UAPA को रद्द कर दे... प्रतिबन्ध को रद्द कर दे.... यह सब संभव है.


अगर आजीवन प्रतिबन्ध भी लगाया जाए... तो जिस कानून के तहत वो लगा है, वही कानून अगर रद्द हों जाए तो प्रतिबन्ध भी स्वतः रद्द हो जायेगा.


ऐसे में किसकी जिम्मेदारी है कि ऐसी सरकारें सत्ता में ना आएं?? भारत में रहने वाले भारतीयों की ही ना??


कांग्रेस के कर्नाटक सरकार ने PFI के विरुद्ध 100 से ज्यादा case वापस ले लिए थे.... क्या आप के लिए यह महत्व नहीं रखता... क्या आपको यह नहीं दिखता??


आज कांग्रेस कई राज्यों में सत्ता में है... POTA हटाने के बाद केंद्र की सत्ता में 10 साल रही है.


इंडियन मुजाहिद्दीन आतंकवादी संगठन के आतंकियों ने batla house किया था.. जिसमें हमारे पुलिस अफसर ने बलिदान दिया था.... आज उस संगठन का मजहब के नाम पर समर्थन करने वाले, और पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चन्द्र शर्मा के बलिदान को फर्जी बताने वाले दिल्ली में सरकार बनाये बैठे हैं....मुफ्त बिजली पानी के नाम पर.


ऐसे में भारतीय किस मुँह से उम्मीद करते हैं कि कोई आपकी सुरक्षा के लिए लड़े.. आतंकवाद को ख़त्म करें..

70 views
bottom of page