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वहाँ मंदिर था या नहीं बल्कि चर्चा यह है की मस्जिद के अंदर से मंदिरों के प्रमाण कैसे निकल रहे है ?

NRI Herald Australia के लेखक की निजी राय , 24 May 2022

चर्चा इसपर हो रही है कि अयोध्या के बाद काशी, मथुरा, कुतुबमीनार और अब ताजमहल, आखिर देश में हो क्या रहा है?


जबकि चर्चा इसपर होनी चाहिए कि आखिर हर मस्जिद के अंदर से मंदिरों के प्रमाण कैसे निकल रहे है ? चर्चा इसपर होना चाहिए कि मंदिरों पर मस्जिद क्यों बनाई गई ?


चर्चा तो इस पर भी होनी ही चाहिए कि देश की स्वतंत्रता के बाद 60 वर्ष से अधिक एक ही दल ने शासन किया उसकी हिन्दुओं के प्रति नकारात्मक भूमिका क्यों रही । और हिन्दुओं के स्वाभिमान को क्यों कुचला।


चर्चा का विषय ये होना चाहिए कि तथाकथित महान मुगलों ने मंदिर क्यों विध्वंस किये ? और जिस दल द्वारा 60 वर्ष से अधिक देश पर एक छत्र शासन किया उस दौरान हिन्दुओं के हत्यारों और लुटेरों के नाम पर नगरों और मार्गो के नाम क्यो रखे ।


चर्चा में यह भी सम्मिलित होना चाहिए कि तथाकथित सेक्युलर, प्रगतिशील मुगलों ने हिन्दू आस्थाओं को रौंदकर मंदिरों पर मस्जिद क्यों बनाई ? चर्चा इसपर भी खुलकर होना चाहिए कि क्या हिंदू आर्किटेक्चर को तोड़ना ही मुगल आर्किटेक्चर था, जिसकी प्रशंसा इतिहासकार करते नही थकते थे।


चर्चा तो इतिहासकारों के झूठ की भी होनी चाहिए जिन्होंने इतिहास के 'सच' को सलेक्टिव इतिहास की 'कब्र' में दफन कर उसके ऊपर झूठे और मिथ्या इतिहास का स्ट्रक्चर खड़ा कर देश को अंधेरे में रखा।और हिन्दुओं के गौरवशाली इतिहास को दबाए रखा।


सच दबाने के लिए चर्चा का विषय मोड़ेंगे लेकिन हमें हर हाल में सेक्युरिज्म की इमारतों में दफन भारतीय इतिहास को कब्र फाड़कर बाहर लाना ही होगा।

हालिया खबर के मुताबिक, कुतुब मीनार परिसर में खुदाई की जाएगी. संस्कृति मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि कुतुब मीनार में मूर्तियों की Iconography कराई जाए. बता दें कि एक रिपोर्ट के आधार पर कुतुब मीनार परिसर में खुदाई का काम किया जाएगा. इसके बाद ASI इसकी पूरी रिपोर्ट संस्कृति मंत्रालय को सौंपेगा।


संस्कृति सचिव ने अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने के बाद यह फैसला लिया है. लिहाजा कुतुब मीनार के साउथ में और मस्जिद से 15 मीटर दूरी पर खुदाई का काम शुरू किया जा सकता है।


जब जब हिन्दू जगेगा और सही चर्चा की और बड़ेगा, सनातन अपने आप पुनर्स्थापित होगा ।


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