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अभूतपूर्व !

प्रधानमंत्री मोदी के कृषि कानून वापस लिए जाने पर एक राय , NRI HERALD द्वारा प्रकाशित 20 Nov 2021

अभूतपूर्व !

अभूतपूर्व भारी शब्द है पर निरंतर दुरुपयोग से जैसे कालजयी और game changer जैसे शब्द अपनी चमक खो बैठे हैं, वैसे ही अभूतपूर्व की आभा भी धूमिल हो गई है ।


इस आवश्यक caveat के बावजूद यह कहना बहुत गलत न होगा कि आज की घटना भारतीय राजनीति में अभूतपूर्व है । इसलिए नहीं कि विषय बहुत महत्वपूर्ण है । नहीं, इससे बहुत बड़े और भारी विषय न जाने कितनी बार कितने शासकों के समक्ष आए होंगे । बात विषय की नहीं है बात उस मानस की है जो ऐसे निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है । यह निर्णय उस साहसी एवं स्पष्टदर्शी मानस की एक झलक देता है । हम और आप इस तरह की स्थितियों से अपने सामान्य जीवन में बार बार गुजरते हैं पर हममें सम्यक निर्णय लेने की दृष्टि और साहस दोनों नहीं होते ।


सुबह बिस्तर में मैंने जब यह समाचार देखा तो मेरे हृदय में आहत आश्चर्य एवं क्षोभ के भाव उठे । ऐसा होना स्वाभाविक था । पर मैं थोड़ी देर बाद जब स्नान कर लौटा तो धुंध छंटती हुई सी मालूम हुई । सतही लोग मेरी इस पोस्ट को मेरी अंधभक्ति का प्रमाण समझेंगे । मुझे उसकी परवाह नहीं । मुझे अपनी भक्ति अभक्ति का प्रमाणपत्र देने की आवश्यकता नहीं । मैं बस देश के शत्रुओं का शत्रु हूं - उतना मेरे लिए पर्याप्त है ।

कई बार पीछे हटने के लिए आगे बढ़ने की अपेक्षा अधिक साहस की दरकार होती है । अपमान, जगहंसाई का भय होता है, आत्मसम्मान आहत होता है । पर जब आप चारों तरफ से घिरे हों तो एक संग पांच मोर्चों पर लड़ना बुद्धिमत्ता का प्रमाण नहीं है । देश के सामने विकराल समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, देश बाह्य एवं आंतरिक शत्रुओं से घिरा है । ऐसे में मान अपमान और कृषि कानून जैसी बात को लेकर शत्रु के हाथ मजबूत करना कोई साहस का काम नहीं है । साहस का काम वह है जो इस शख्स ने किया है । और एकदम साफ किया है, हीला हवाली की जगह नहीं छोड़ी है ।


डॉक्टरी के क्षेत्र से उदाहरण दूं तो बात थोड़ी और स्पष्ट हो । प्राणरक्षक chemotherapy की दवाओं के कारण यदि खून की कोशिकाओं में भारी गिरावट आ जाए या sepsis हो जाए तो कायदे का डॉक्टर कैंसर ठीक करने के चक्कर में chemotherapy जारी रख कर रोगी की जान नहीं लेता, पीछे हट जाता है, स्थिति को फिर से assess कर उचित निर्णय लेता है । कैंसर को मारने के प्रयास में रोगी को मारना महान चिकित्साशास्त्री का लक्षण नहीं है ।


कृषि में सुधार अत्यंत आवश्यक है । किसान बिल किसानों के हित में थे । किसान बिलों का वापस होना एक प्रगतिशील कदम का वापस होना है, किसानों को हानि पहुंचाने वाला है । पर चीन और पाकिस्तान के खतरों से देश को बचाना, देश के अंदर गहराई तक घुसी देशतोड़क शक्तियों से निपटना, देश के टूटे हुए ढांचे को दुरुस्त करना, अर्थव्यवस्था में आधुनिकीकरण एवं गत्यात्मकता लाना - ये भी कम आवश्यक और महत्वपूर्ण नहीं हैं ।


और चुनावों को ध्यान में रखना कोई पाप नहीं है । जो चुनाव न जीत सकेगा वह घंटा बजाने के अतिरिक्त और कुछ न कर सकेगा । इस देश में सुधार उसी गति से हो सकेगा जितनी गति पचाने की इस देश की शक्ति है । दक्षिण अमेरिका के देशों के उदाहरण सामने हैं । जिन सरकारों ने उस तेजी से सुधार करने का प्रयास किया जो वहां की जनता पचा नहीं सकती थी, न सिर्फ वे सरकारें गिर गई बल्कि सुधार आगे जाने की जगह पीछे चले गए ।


भारत चीन नहीं है । यहां चीन की तरह जबरन सुधार न हो पाएगा । देश में महत्वपूर्ण क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं । मैं उनकी फेहरिस्त नहीं गिनाऊंगा । मान अपमान और जगहंसाई के भय से उन्हें खतरे में डालना घातक होगा ।

Statecraft

कोई सीधी सड़क नहीं, घुमावदार रास्ता है । एक तरफ पहाड़, दूसरी तरफ खाई, नीचे फिसलन और सामने से आता ट्रैफिक है ।


किसान बिल पारित करना सही था । आज जो हुआ वह भी सही है ।


इस बात ने आज फिर यह सिद्ध किया कि यह शख्स कोई मामूली नेता परेता नहीं है ।

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