• NRI Herald

भारत की खुशबू - प्रवासी भारतीयों को समर्पित एक भावपूर्ण रचना

रीता राजपूत जी द्वारा रचित - NRI हेराल्ड हिन्दी द्वारा प्रकाशित , 13 July 2021

सहेजकर अपने संस्कार

समेटकर अपनी संस्कृति

ले जाते हैं साथ में -

घर - आँगन की संतति ।

पढ़ते हैं भारत को

लिखते हैं भारत को

चिंतन में हर क्षण -

जीते हैं भारत को !


आचरण में अपने पिरोते हैं ‘हिंदी’

हर्षाती ’मम’ भी लगाकर के ‘बिंदी’

होली- दिवाली जब, मनती विदेश में

संजोते हैं सपने वो, आने को देश में ।


बिखरा के भारत की ख़ुशबू विदेश में

पाहुन- से आते हैं, अपने ही देश में

किस्से कुछ सुनते हैं, अपने सुनाते हैं

माटी में भारत की, पाँव धर जाते हैं ।


उत्सव छा जाता है, घर-परिवेश में

आते हैं अपने जब, अपनों के देश में !!


रुचकर भोजन पकाती है ‘मैया’

बलि-बलि जाती है, लेती बलैया !

फिर-फिर सुनाती है छुटपन की बातें

करता था जब मैं, मौहल्ले में घातें -


आते थे लड़ने पड़ोसी भी तेश में -

लगते हैं सपने सब, अब इस वेश में !

पर अब वो क़िस्से, ख़त्म हो गए हैं ।


तरक़्क़ी कर शायद -

हम बड़े हो गए हैं !

याद तो करते हैं -

निशदिन जड़ों को


पर जाने सब क्यूँ ?

व्यस्त हो गए हैं ।।

 

रीता राजपूत जी दो दशक से भी ज्यादा हिन्दी की अध्यापिका और DPS इंदिरापुरम, दिल्ली NCR में हिन्दी की विभागाध्यक्ष (HOD) के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर चुकी है | हजारों छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के बाद, रीता जी ने व्यवसाय की दुनिया मे कदम रखा और परिणामस्वरूप आजकल रीता जी Neeta Polycots जोकि एक अन्तर्राष्ट्रीय कपड़ा उत्पादन कंपनी है उसमे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप मे कार्यरत है.

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